Durbal Divyang Kalyan Society (REGD.)

अंतर्मन

संसार में मनुष्य का जन्म हमारे लिए भगवान् का दिया हुआ सबसे बड़ा उपहार है | अब से करीब 26 वर्ष पूर्व की एक घटना ने मेरे जीवन में एक संस्था को जन्म देने के लिए प्रेरित किया | कैलाश नाम का युवक बी - ब्लॉक ,नांगलोई कैंप नंबर-2, नई दिल्ली में रहता था | उसके पिताजी दिल्ली के हिंदूराव अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे | कैलाश भी रात को उन्हीं के साथ वहीं अस्पताल में था अचानक उसकी भी तबियत खराब हो गई और उसे लकवा (पैरालिसिस अटैक) की चपेट में आ गया जिससे उसकी दोनों पैर व रीड की हड्डी शून्य गई और वह दिव्यांग ( हैंडीकैप्ड ) हो गया | उसके परिवार में माँ को आँखों से कम दिखायी देता था | उसकी पत्नी और एक बेटा था | कुछ दिनो के बाद पिताजी की मृत्यु हो गई बेटे और पत्नी भी पर लोक को सिधार गए | घर में भाई और भाभी कोई ध्यान नहीं देते थे वृद्ध माँ देखभाल करती थी और उसे खाना खिलाती थी तथा उसका ध्यान रखती थी | वह बिस्तर पर ही पड़ा रहता था | जिसके कारण उसे बिस्तर सोल हो गया था |

उसकी माँ एक दिन मेरे पास आयी और मुझे व्यथा सुनाई और तभी मैं उसे दिल्ली के जाने माने इंस्टिट्यूट आई.पी.एच (इंडियन इंस्टिट्यूट आफ फिजिकल हैंडीकैप्ड ) आईo टीo ओo लेकर गया | वहां उसका इलाज कराया तथा उसके कृत्रिम अंग उपकरण बनवाए व एक तीन पहिये की साईकिल (ट्राई साइकिल ) दिलायी | मैं उसको थ्री व्हीलर में नांगलोई से आई.पी.एच लेकर जाता था तथा ईलाज करवाकर वहां से लेकर आता था इस कार्य में मेरा पूरा दिन लग जाता था | कभी कभी थ्री-व्हीलर में बिठाते वक्त उसके पैर में चोट लग जाती थी और खून मेरे कपड़ों में लग जाता था , तो लोग मेरे को देख कर हंसते थे | किन्तु मेरा मन और तन उसके इलाज कराने के लिए कभी नहीं हारा | जिसके फल स्वरुप लगातार उसका इलाज चलता रहा , बाद में वह ठीक हो गया था और ट्राई साइकिल से बाहर आने जाने लग गया | ज्वालापुरी प्लास्टिक बाजार सामुदायिक केंद्र (कम्युनिटी सेंटर) के पास मैंने उसे एक दिव्यांग ( हैंडीकैप्ड ) बूथ आबंटित करवाया तथा महा नगर टेलीफोन निगम लिमिटेड द्वारा टेली फ़ोन भी लगवाया जिससे वह अपना रोजगार कर 10 वर्ष तक जीवन यापन करता रहा | बाद में अचानक दिल धड़कन से उसकी मृत्यु हो गयी |

मेरे मन में इस घटना से बहुत पीड़ा हुई और मेरा मन ऐसी घटनाओं के समाधान हेतु निरंतर कुछ न कुछ चिंतन करता रहता था | मैंने विचार किया कि क्यों न दिव्यांग जनो के लिए एक संस्था का निर्माण किया जाए जो इनके संपूर्ण पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए काम करें | क्योंकि जब मनुष्य के जीवन में कष्ट आता है तो घनिष्ट मित्र व परिवार के लोग भी साथ देने से मुँह मोड़ने लगते है और रास्ता बदल लेते हैं | तब मैंने पूरे संकल्प के साथ “ दुर्बल कल्याण सोसायटी “ की नींव रखी जिससे वह लगातार दिव्यांगों के लिए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनo सीo आरo) में कैंप का आयोजन करती रहे

इस संस्था द्वारा दिव्यांगों को ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर ,कृतिम अंग , जूते, कैलिपर , सुनने की मशीनें और बैसाखी इत्यादि सामग्री के साथ साथ उनको ट्राईसाइकिल के पीछे संदूक भी लगवाकर दिए | यह सारे कार्य करते हुए दिल्ली एवं एन.सी.आर. में लगभग 50,000 से अधिक लोगों को हमारी संस्था द्वारा लाभान्वित कराया गया | सेवा कार्यालय- A-5A ओल्ड स्लम पश्चिम पुरी पुनर्वास केंद्र में प्रतिदिन जरूरतमंद दिव्यांग व्यक्तियों के संपूर्ण विकास हेतु ओoपीoडीo लगाकर इनकी मदद की जाती है |

अब मुझे बहुत संतोष होता है जब महीने की प्रत्येक 25 तारीख को कैंप का आयोजन किया जाता है | अब तक संस्था द्वारा 130वाँ सहायता शिविर का आयोजन सफलता पूर्वक किया जा चुका हैं | संस्था के द्वारा मोतियाबिंद मुक्त दिल्ली अभियान चलाया जा रहा है जिसमें अब तक हजारों लोगों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन निशुल्क कराए गए | प्रत्येक 25 तारीख को हमारा स्वास्थ्य जाँच शिविर लगता है जिसमें 300 - 400 चश्मे हर महीने बांटे जाते हैं | निशुल्क ट्राईसाईकिल, व्हील चेयर, मोटराईज्ड साइकिल , बैटरी रिक्शा वितरण करना उनको आत्मनिर्भर बनाना ,पेंशन वितरण करना ,बेरोजगार युवकों को ट्रेनिंग देना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना जैसे कार्य सफलता पूर्वक संपन्न हो रहे हैं |

प्रत्येक 25 तारीख को 500 लोगों को लंगर भी बांटा जाता है तथा अभावग्रस्त गरीब कन्याओं की शादी में मदद करना संस्था का उद्देश्य तथा प्राथमिकता में शामिल है | श्री केशवराम बलिराम हेडगेवार जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक ने कहा था कि “ नर सेवा ही नारायण सेवा “स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा “यह दरिद्र नारायण की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है “इस उद्देश्य और यही सिद्धांत को लेकर हम आगे चल रहे |

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा कि यदि देश की प्रगति का मूल्यांकन करना हो तो अंतिम व्यक्ति को देखकर मूल्यांकन करना चाहिए तब उस देश की प्रगति का पता चलता है

इस संस्था का उद्देश्य देश के अंतिम व्यक्ति का विकास करना है | जब भी देश में प्राकृतिक आपदा आयी हमने हमेशा संस्था की ओर से मदद की है | गुजरात में भूकंप आया तो भुज में इंद्रप्रस्थ गांव बसाया गया उसमें मदद की , रोहतक में राहत सामग्री पहुंचाई, उड़ीसा में राहत सामग्री पहुंचाई, कारगिल युद्ध के समय रक्तदान शिविर लगाया |

संस्था में सैकड़ों स्वयं सेवक (वॉलिंटियर ) हैं जो हर 25 तारीख को सेवा करते हैं | कुछ सेवक भारत सरकार से रिटायर्ड भी है तथा कुछ महिलाएं हैं जो लगातार सेवा कर रही हैं | यह सभी मेरा परिवार परिवार है | हम दिव्यांग जनों को वित्तीय सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाते हैं तथा महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने एवं खुशहाल जीवन व्यतीत करने का रास्ता बनाने का प्रयास करते हैं |

मुझे गर्व की अनुभूति होती है कि हमारे शिविरों (कैंपों) में भारत के वर्तमान महामहिम राष्ट्रपति माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी मुख्य अतिथि के रूप में पधार चुके है |

इससे पूर्व भारत सरकार के अनेकों केंद्रीय मंत्रीगण, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ0 साहिब सिंह वर्मा जी, पूर्व मुख्यमंत्री श्री मदन लाल खुराना जी सहित अनेक गणमान्य लोग व वरिष्ठ अधिकारी गण अनेको बार संस्था के कार्यक्रमों में उपस्थित होकर तथा अपना आशीर्वाद व शुभकामनाएं दे चुके हैं |

हमारी संस्था के मुख्य संरक्षक के रूप में डॉ0 साहिब सिंह वर्मा जी का अविस्मरणीय योगदान रहा है | अब वर्तमान में भारत की राजधानी दिल्ली के प्रिय सांसद श्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा जी संस्था के मुख्य संरक्षक हैं जो संस्था के लिए असाधारण पथ प्रदर्शित कर रहे है |

अनेक सांसद, विधायक , प्रशासनिक अधिकारी, धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी तथा दिल्ली की विभिन्न संस्थाएं हमारे साथ जुड़ी हुई है और सभी हमारे कार्यक्रमों में आते हैं व हमें सहयोग करते हैं | हमारी संस्था रोजगार हेतु समय-समय पर “ रोजगार शिविर “ भी लगाती है | जिसमें रोजगार से जुड़े अनुभवी (एक्सपर्ट ) लोगों को बुलाकर जरूरतमंद युवक-युवतियों को रोजगार के अवसर प्रदान कराते है |

संस्था महिलाओं को स्वरोजगार हेतु सेवा , बस्तियों में पुनर्वास ,कालोनियों में पापड़ बनाना, अचार बनाना, सिलाई (टेलरिंग) का काम सिखाना, कुटीर उद्योग ,हस्तकला सिखाना आदि कार्यक्रम भी बखूबी आयोजित करती है | स्वच्छता को लेकर हमारी संस्था के स्वयं सेवक (वॉलिंटियर ) सेवा बस्तियों तथा झुग्गी झोपड़ियों में जाकर वहां के लोगों को साफ - सफाई का ध्यान रखना ,हाथ धोकर खाना खाना, बच्चों को बताना कि खुले में शौच नहीं करना , टॉयलेट का प्रयोग करना आदि कि जानकारी देकर “ स्वच्छ भारत मिशन “ को साकार कर रहे है |

वर्तमान में कोरोना महामारी (COVID -19 ) जो पूरे विश्व में अपना विकराल रूप धारण कर मृत्यु का कारण बन रही है I मुसीबत के ऐसे समय में हमारी संस्था द्वारा लगातार 30 दिनों तक भंडारे का आयोजन किया तथा गरीबों , निर्धन , बे-घर व असहाय लोगों के भोजन के लिए प्रतिदिन 4000 पैकेट ( 2000 दिन में 2000 शाम) को सेवा कार्यालय A -5A ओल्ड स्लम फ्लैट, मेन क्लब रोड, पेट्रोल पंप के सामने पश्चिमपुरी कार्यालय के सामने वितरण कर रहे हैं |

जिसमें अब तक लाखों लोग लाभान्वित हुए हैं और गरीबों को पेट भर खाना मिल रहा है | बच्चों के लिए मिल्क पाउडर भी बांटा जा रहा है | इसके साथ जरूरतमंद लोगों को मुफ्त दवाइयां मुहैया की जा रही है |

हमारी संस्था की ओर से घर-घर और झुग्गी- झोपड़ी सहित पूरे क्षेत्र को स्वच्छ व सैनिटाइज किया गया है | यह संस्था के समर्पित एवं कर्मठ कार्यकर्ताओं के प्रयासों से संभव हो रहा है |

संस्था का उद्देश्य है कि देश की तरक्की में सबकी भागीदारी हो, कोई भी वर्ग पीछे न रहे, कोई इस देश में दिव्यांग न रहे, कोई असहाय न रहे, कोई दुर्बल न रहे, सभी शक्तिमान हो, सभी स्वाभिमानी हो, देश के लिए कोई छोटा-बड़ा न हो, सभी को भोजन मिले, सब को बराबर का दर्जा मिलें, और मनुष्य सब एक हो चाहे कोई हिंदू ,मुस्लिम, सिख या इसाई हो | किसी तरह का कोई भेदभाव न हो, और कोई वर्ग वाला भेदभाव भी न हो, सभी शिक्षित हों , शारीरिक व मानसिक रूप से सभी स्वस्थ एवं मजबूत रहे | संस्था गिरे हुए का सहारा , निराशा में आशा की किरण , मासूम के चेहरे पर खुशी लाने का यन्त्र , सपनों के उड़ान को साकार करने का उपकरण, संकल्पों को साकार करने का अवसर प्रदान करती है |

दिव्यांग जो मोटर साइकिल से 20 किलोमीटर रोजगार के लिए जाते हैं उनके संकल्पों को साकार करती है, ट्राईसाईकिल पर संदूक लगा कर उस पर सामान रखकर बेचने का काम, उनको अपने पैरों पर खड़ा करने का काम यह संस्था कर रही है | यह संस्था ऐसे लोगों की आवाज है जो कहीं कह नहीं सकते , बोल नहीं सकते, केवल अपनी भावनाएं व्यक्त करना चाहते हैं, आंखों से दिव्यांग जिनकी इच्छा शक्ति और संकल्प इस दुनिया में कुछ करने का है | संस्था का उद्देश्य है - “ पंक्ति के अंतिम में खड़े व्यक्ति को आगे लाना “ ||

आओ हम सब मिलकर इस संस्था द्वारा एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करें जिसमे हम एक व्यक्ति नहीं , एक वंश नहीं , एक धर्म नहीं, अंध विश्वास नहीं ,भेद भाव नहीं ,ऊंच नीच नहीं ,अपना पराया नहीं , तेरा मेरा नहीं ,इसका उसका नहीं , अमीर निर्धन नहीं अपितु समानता , समरसता ,निर्भयता ,राष्ट्र प्रेम कि भावना के साथ इस पवित्र संकल्पना को पूर्ण करने के लिए एक शाश्वत संस्कृति के संवाहक हों |

जय हिंद |

- कैलाश सांकला  
( संस्थापक अध्यक्ष )